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सब्र का फल मीठा होता हैं – Story Sabra Ka Phal Meetha Hota Hain

सब्र का फल मीठा होता हैं1

आज एक और नई कहानी हिंदी की न्यूज़ के पेज पर,अक्सर अपने देखा होगा और सुना भी होगा की सब्र का फल मीठा होता हैं। बड़े हो या बूढ़े या फिर बच्चे हो सभी लोगो को बोलते सुना होगा की सब्र का फल मीठा होता हैं। आज हम अपने इस आर्टिकल में इस मुहावरे पर लिखी हुई इस कहानी को पढ़ेंगे।

हिंदी में इस मुहावरे को सब्र का फल मीठा होता है बोलते है और वहीं इस मुहावरे को इंग्लिश में Sweet are the fruits of adversity कहा जाता हैं।

इस मुहावरे का सही अर्थ हैं,की जिनमे धैर्यता होता है, उन्हें उनके कर्मो का फल भी ज्यादा अच्छा मिलता हैं। धैर्यता ही एक ऐसा गुण है,जो मनुष्य को ऊंचाई के शिखर तक ले जाता हैं। सफलता के मुख्य बिंदु हिम्मत और धैर्य ही है। इसलिए हमे कैसी भी कोई भी परिस्थिती हो उसमे धीरज को नहीं छोड़ना चाहिये।

जिस तरह से आग में तप कर सोना चमकता है, ठीक वैसे ही धैर्यवान व्यक्ति भी मुसीबत की घड़ी में दमकता है जीवन में धैर्य को हमेशा बनाये रखना चाहिए।

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तारों को अपनी चमक की इर्षा

तारों को अपनी चमक की इर्षा

सूरज के डूबने के ठीक बाद का समय संध्याकाल के समय का होता है। जैसे ही संध्याकाल का समय आता है,ठीक कुछ देर बाद में ही आसमान में काली घटायें छाने लग जाती हैं। तब तारों के बीच आसमान में निकलने की प्रतिस्पर्धा भी होने लग जाती हैं। सभी को आसमान में प्रकट होने की अपनी-अपनी जल्दी लगी रहती हैं। जैसे–जैसे रात का समय बीतता जाता हैं, ठीक से आसमान में छा जाने की तीव्रता और अधिक मात्रा में तेजी से बढ़ती जाती है। इस तरह से ही आसमान में अनगिनत तारे छा जाते हैं, लेकिन वो जितनी तेजी से आते हैं, उन पर सभी नजर ध्यान से केन्द्रित भी नही हो सकती है, सभी तारे आपसी होड़ में जल्दबाजी करने में लगे रहते हैं,इसलिए हर एक तारे पर किसी की भी नजर नहीं जाता इसलिए उनकी सुंदरता फीकी पड़ जाती हैं।

लेकिन,जब भी स्वाति नक्षत्र का आसमान में आगमन होता हैं, वो चमक बहुत ही बड़ी धैर्यता के साथ आसमान में फैलती हैं, और इस वजह से ही सभी स्वाति नक्षत्र की तरफ आकर्षित हो जाते हैं। कई सारे लोग तो चेहरे पर मुस्कान के साथ हर कोई स्वाति नक्षत्र की आभा का वर्णन भी करता है, स्वाति नक्षत्र की सुंदरता बहुत ही अद्भुद होती है।

इसी तरह से प्रतिस्पर्धा में फँसे हुए सभी तारे केवल एक कौने में ही पड़े रह जाते हैं, और इस तरह से ही स्वाति नक्षत्र की प्रशंसा सुन सभी तारों को ईर्षा का भाव आ जाता हैं।

तभी वो सभी तारे अपनी व्यथा को नारद मुनि से जाकर कहते हैं। तब जाकर नारदजी उन्हें समझाते हैं,कि इस संसार में सिर्फ उसी की ख्याति होती हैं। जिनमे धैर्य का भाव होता हैं। ये बात बिलकुल सही है,की जिनमें आवश्यक से अधिक उतावलापन दिखाते है। लोग अक्सर ही उन्हें अनदेखा भी कर देते हैं। हमेशा कीमत जो होती है,वो सब्र की ही होती हैं, इसलिए कहा जाता हैं, सब्र का फल मीठा होता हैं। तभी नारद जी सभी तारो से कहते हैं तुम सभी तारों में धैर्य की बहुत कमी हैं और स्वाति नक्षत्र में अपार धैर्य मौजूद हैं, जिसके कारण उसकी ख्याति तुम से कई जयादा अधिक हैं। इसलिए वो अधिक सम्मान भी पाता हैं। इस तरह से सभी तारों को सब्र का फल मीठा होता हैं, तब यह बात उन सभी तारो को समझ में आई।

सामान्य जीवन में “सब्र का फल मीठा होता हैं” के लिए कुछ उदाहरण

  • जब आप के अंदर धैर्य और परिश्रम होगा तो आप वो सब कुछ पा सकते हैं, जो शक्ति और शीघ्रता से कभी भी नहीं प्राप्त कर सकते हो।
  • सब्र एक ऐसी सवारी है,जो अपने सवार को कभी भी न तो किसी के कदमों में गिरने देता है और न ही कभी किसी की नजरों में गिरने देती है।
  • धैर्य रखने का सही अर्थ उदासीन होना नहीं होता है। यदि हम को किसी भी कार्य में सफलता को पाना है,तो हमें अपनी कार्य में लगातार कार्य करते रहना चाहिए और विश्वास को बनए रखना चाहिए और उस कार्य में सफलता मिल जाने तक प्रतीक्षा भी करनी चाहिए।
  • किसी भी व्यक्ति के अंदर अगर धैर्य हो तो उसकी दरिद्रता भी शोभा देती हैं।

मेरे द्वारा लिखे गए इस आर्टिकल में अगर मुझ से कोई भूलवश त्रुटि हो गई हो,तो उसके लिए में क्षमा प्रार्थी हैं।

नोट – अगर आप ऐसी ही और भी पुरानी कहानियां पढ़ना चाहते हैं,तो आप हमारी वेबसाइट Hindi Ki News से जुड़े रहे।

हमारा आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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